आवाज कि दुनिया के दोस्तों (३)
सायगल साहब के गानों के बारे में बात करना चाहें तो बातें कभी खत्म नहीं होगी ! उनके गाये हुवे सारे के सारे गाने नायाब नगीनों जैसे हैं. चाहे वे पंकज मल्लिक , तिमिर बरन , आर. सी. बोराल या नौशाद के निर्देशन में गाए फिल्मी गीत हों या रवीन्द्र संगीत , ग़ज़ल , दादरा, ठुमरी या भजन. बस सुनते ही रहिए! चंडीदास, धरती माता, दुश्मन जैसी सफलतम फिल्मों के बाद सायगल साहब के अभिनय और संगीत का सूर्य चारों और चमकने लगा. धन की वर्षा होने लगी, फिर भी जन्मजात ईन्सानियत, आम जनता के प्रति समानत्व तथा अनुकंपा कभी कम न हुवे. दुर्गा पूजा के वक्त कुछ मोहल्लों में पैसे की कमी की वजह वे किसी कलाकार को बुला नहीं पाते. ऐसा ही कोई पंडाल खाली दिखे, तो सायगल साहब गाडी से उतर कर, हार्मोनियम मांग कर रवींद्र संगीत या अपनी ही बांग्ला फिल्म के लोकप्रिय गाने छेड देते थे. लोग ईकठ्ठा हो कर प्यार से सूनते थे. अंत में वे माँ दुर्गा की प्रतिमा को नमस्कार कर वहां से चले जाते. *** सायगल साहब की जीवनकथा की फिल्म का एक प्रसंग और भी हृदयद्रावक है. जालंधर ...