जाने कहां गये वो दिन
अलौकिक आवाज के स्वामी सायगल साहब फिल्म जगत को अल विदा कह कर जब जालंधर चले गये , लोगों के दिलों में एक खालीपन - सा छा गया . सब उनकी आवाज़ , उनके नये गाने सुनने को तरस रहे थे . रसिकों की लाख कोशिश के बाद भी न वे मुंबई लौट आये , ना ही उन्हों ने कोई नया गाना रेकोर्ड किया . फिल्मों की दुनिया में गायक - अभिनेता का शून्यावकाश - सा छा गया . देश के हर कोने में उन के आवाज की नकल करने वाले गायकों में सायगल साहब न का स्थान लेने की स्पर्धा शुरू हो गयी . भारत के कई उभरते गायकोंने सायगल साहब के स्वर , लय, शब्द और आवाज की गहराई की नकल करना शुरू किया . उनमें से दो युवक कुछ हद तक सफल भी हुवे . एक थे हैदराबाद सिंध के आतमचंद हशमतराय चैनानी और दूसरे , दिल्ली के एक साधारण से मध्यमवर्गीय कायस्थ परिवार के मुकेश चंद माथुर . देश की आजादी के कुछ ही वर्ष पहले कि बात है . आतम चंद ...